हमारे देश में हर राज्य का कोई न कोई त्योहार ऐसा जरुर होता है जो पूरे देश में फेमस होता है. लेकिन सेटेलाइट टेलीविजन के आने से पहले तक यह त्यौहार अपने राज्य तक ही सीमित थे. जैसे दुर्गा पूजा, गणेश चतुर्थी, करवा चौथा इनका सबसे बड़ा उदाहरण हैं.
साल 2000 के बाद आए ज्यादातर टेलीविजन सीरियल ने
त्यौहार को एक अलग महत्व दिया है. 90 के दशक के बच्चों के लिए ये सब नई चीजें थी.
अब टीवी सीरियल में महाराष्ट्र का प्रसिद्ध
गणेश चतुर्थी, उत्तर भारत का करवा चौथ दिखाई देने लगा. लोग भी इन त्यौहारों
को लेकर बड़े उत्साहित होते थे. इससे पहले लोगों को इन सबमें कोई दिलचस्पी नहीं थी.
मुझे अच्छे से याद है मैंने सबसे पहले गणेश चतुर्थी के बारे में टीवी सीरियल में ही
देखा था. मुझे यह सब देखने में बहुत ज्यादा आकर्षित लगा था. हमेशा मन में यह इच्छा
होती थी कि बड़े होकर एक बार महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी जरुर देखूंगी. लेकिन
पॉपलुर कल्चर के कारण आज तो मेरे यहां भी कई लोग मनाने लग गए हैं. अब यह हर जगह हर
अपने-अपने हिसाब से मना रहे हैं. अब यह महाराष्ट्र के मराठियों का ही नहीं ब्लकि
भारत के हर हिस्से का त्यौहार बन गया है.
बचपन में जिस गणेश चतुर्थी को देखने की इच्छा
टेलिविजन सीरियल और न्यूज चैनल्स से शुरु हुई थी. वह 2018 में जाकर पूरी हुई. इसका
पूरा मजा बंगाल की दुर्गापूजा जैसा था. दुर्गापूजा को हमने बचपन से ही देखा था.
मेला, नए कपड़े, लोगों की भीड़, अष्टमी में पूजा, और बहुत कुछ. यही सारी चीजें
मुझे वर्धा की गणेश चतुर्थी में नजर आई. वही मेला लोगों की भीड़ हर तरफ हलचल. सब
एक चीज थोड़ी सी अलग थी, महाराष्ट्र के
लोग गणेश पूजा के दौरान मूर्ति की स्थापना अपने घर में भी करते हैं ,जबकि बंगाल
में लोग मूर्ति की स्थापना घर पर नहीं करते. बंगाल में मंत्रों का उच्चारण बंगला
में होता है और महाराष्ट्र में मराठी में. दोनों जगहों में सबसे प्रसिद्ध त्यौहार
का मजा एक जैसा ही नजर आया.
बचपन
में उस समय 24 घंटे प्रसारित होने वाले न्यूज चैनल्स में कपूर परिवार की गणेश
चतुर्थी के विसर्जन को नहीं देखा होता तो शायद इसे देखने की इतनी ललक भी न होती. उस
समय के प्राइवेट चैनल्स ने हमारे बचपन को इतना रंगीन बनाया था जहां सीरिल्स सिर्फ
सीरिल्स नहीं बल्कि सांस्कृतिक स्थानन्तर का जरिया बन गए.
#90kidsबचपन-का-झूला



