शनिवार, 9 अप्रैल 2016

जरा इन दलालों से रहे सावधान

घूमना-फिरना किसे पसंद नहीं होता. हर किसी को घूमना फिरना मौज मस्ती करना पसंद है, भले ही वह किसी भी उम्र का क्यों न हो. घूमना-फिरना जीवन की आधारभूत जरूरत है। अगर कोई इंसान घूमे फिरे न और एक ही जगह में कई सालों तक रहे तो उसका मन भी एक ही जगह रह-रह कर उब जाता है। मन किसी चीज से न ऊबे इसलिए घूमे फिर ताकि मन हमेशा तरोताजा महसूस करे। घूमने-फिरने का मजा चार गुना और ज्यादा हो जाता है जब आप सपरिवार कहीं जाते है। लेकिन कई लोग ऐसे होते है जिन्हें अकेले घूमना बहुत पसंद होता जैसे की मैं। खैर बात करते है यात्रा के दौरान आने वाली बाधाओं की जो कि मूड को पूरी तरह से खराब कर देती है और यात्रा का मजा भी किरकिरा कर देती हैं। लेकिन अगर आप अपनी गाड़ी से जाते है तो ऐसी परेशानियां थोड़ियां कम होती हैं। अगर आप बस से जा रहे है तो इसकी संभावना बनी रहती और खास कर जब आप दिल्ली से बस पकड़ रहे हो और पहली बार जा रहे है तो आपके साथ कोई न कोई घटना घटनी लाजमी सी बात है। बस स्टैण्ड के बाहर कान्टैण्ड़र के नाम पर खड़े दलाल आपकी यात्रा में जहर घोलने के लिए काफी होते हैं। कुछ दिनों पहले की बात है मैं, मेरा भाई, और मेरा बेस्ट फ्रैंड पंजाब गए थे। दुर्भाग्यवश हमारी ट्रेन की टिकट कॉन्फर्म नहीं हुई थी और जाना भी जरूरी था कई सालों बाद हमारे घर में कोई खुशी की घड़ी आई थी। तो आखिरकार हम तीनों ने निर्णय लिया की अब हम सब बस से जाएंगे। हम तीनों को अलग-अलग जगहों से आना था तो निर्णय लिया गया कि जो सबसे पहले आईएसबीटी पहुंचेगा वहीं जाकर हम तीनों की टिकट ले लेगा क्योंकि पहली बार हमलोग बस से जा रहे थे तो जाने का कोई खास अंदाज नहीं था. खैर इसी दरमिया मेरा छोटा भाई बस अड्डे पहुंचा और आ गया किसी दलाल की चपेट में। फिर क्या था उसके बाद में पहुंची उसने मेरी बात उस दलाल से कराई। इस बारे में ज्यादा नॉलेज नहीं थी तो मैंने उसकी हां में हां भर दी और हमें बताया गया कि बस 10 बजे यहां से खुल जाऐगी। ऐसे कई एक लोग उस दलाल के झांसे में आ गए। जिन्हें जम्मू की बस बताकर चढ़ा तो लिया और बाद में भाड़े में से 150 वापस कर दिया और कहा बस सिर्फ जालंधर तक जाएंगी। खैर इन सब के बाद बस 10 के बजाए 11 दिल्ली से चली। चलने के बाद ही परेशानियां शुरू हो गई. बस यहां से लगभग अभी सोनीपत ही पहुंची होगी और आधे घंटे तक के लिए खड़ी हो गई जब लोगों ने शोर शराबा किया तो बस वाला कहने लगा कि टैक्स दे रहे है यह बात मुझे समझ में भी नहीं है क्योंकि जहां तक मुझे पता है हाइवे में तो टैक्स के तौर पर टोल प्लाजा में पैसे दिए जाते है ये पता नहीं काहे का टैक्स था। इन सब के बीच तेज हवा के बीच बस सड़क की दूरी को कम करती है अपनी लक्ष्य की ओर बढ़ने लगी। सुबह होने तक बस पंजाब में प्रवेश कर चुकी थी। बस यही से शुरू हुआ असली ड्रामा दिल्ली से पहले तो लोगों को कहा गया की बस जम्मू जाएगी फिर उन्हें जांलधर बताया गया. लेकिन अब जो हुआ था वो तो किसी भी इंसान को सुबह 6 बजे गुस्सा दिला सकता है। बस लुधियाना पहुंची और बस का ड्राइवर और कान्डैक्टर कहने लगे कि बस यहां से आगे नहीं जाएगी आप लोगों के लिए दूसरी बस आ रही है जो आप लोगों को जांलधर पहुंचा देगी। कईयों का तो गुस्सा फूट गया जब लोगों ने इसका विरोध किया तो ड्राइवर कहने लगा कि बस खराब हो गई है। लोग इकट्ठा होकर थाने की ओर जाने लगे इतने में ही किसी ने कहा कि पुलिस के पास जाने से कोई फायदा नहीं होगा पुलिस भी इनके साथ मिली होती है। क्योंकि यहां आए दिन ऐसी घटनाएँ होती रहती है क्योंकि इनके पास लाइसेंस नहीं होते है और ज्यादातर बस वाले ऐसे ही करते है। इससे कई यात्रियों को दो बार बस बदलनी पड़ी। इसलिए जब कभी भी आप यात्रा करें तो कोशिश करे कि इन दलालों से किसी तरह की मदद न ले खुद बस के पास जाकर जानकारी लें क्योंकि दलाल तो वहीं रह जाता है और परेशानी आम इंसान को उठानी पड़ती है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें