जिदंगी एक सदावाहिनी नदी की तरह है जिसके रास्ते में रोड़े तो बहुत
आते है लेकिन वह सबको पार करती हुई आगे बढ़ती रहती है। इंसान की जिदंगी का भी कुछ
ऐसा सा ही हाल है। कभी कुछ परेशानी तो कभी कुछ। कभी घरवालों से लड़ाई,कभी बॉस की
डांट, कभी काम का ज्यादा प्रेशर तो कभी काम न होने का प्रेशर यह सारी चीजें कई बार
हमारी जिदंगी को इतना झंझोर कर रख देती है की लगता है कि सब जीना ही बेकार है। कोई
बार ऐसा भी होता है कि हम स्वयं ही ऐसी परेशानियां अपने आप में ले आते है जिसका हमारी जिदंगी में न होने से कुछ ज्यादा
फर्क नहीं पड़ता है। इन्हीं में से एक है लिविंग रिलेशन में रहना.
प्यार करने में कोई बुराई नहीं है. ब्लकि सांइस की परिभाषा से देखा
जाए तो अगर किसी इंसान की अंदर किसी तरह की भावना, संवेदना किसी एक के लिए न हो तो
वह आम इंसान नहीं हो सकता है. तो इस हिसाब से सांइस भी हमारे प्यार की परिभाषा को
सच ठहराता है.
खैर अब बात करते है प्यार और लिविंग रिलेशन मे अंतर की. जब हम किसी एक
से प्यार करते हो तो संसारिक और मानसिक भावनात्मक रूप से पूरी तरह से उससे जुड़
जाते हैं. कई बार ऐसा होता है प्यार पहले होता है शादी बाद में होती है और भारतीय संस्कृति के हिसाब से आज भी ज्यादातर शादी
पहले होती है प्यार बाद। खैर दोनों में प्यार आ ही जाता है. सब पंगा आता है जब इन
दोनों चीजों के बीच में लिविंग रिलेशन आ जाता है.
मैं लिविंग रिलेशन के खिलाफ
नहीं हुई. लेकिन इसमें कुछ बुराईयां है जो कभी-कभी हमें मौत के घाट उतार देती है
और फिर मां बाप लिविंग पार्टनर पर इल्जाम लेने लगते है कि लड़का मेरी लड़की को
मारता था उसके साथ अत्याचार करता था इसलिए उसने खुदकुशी कर ली.
मेरे हिसाब से आप मेरी बात को तो समभ गए होगें की मैं किसकी बात कर
रही है. वहीं जिसने पहले अपने अभिनय से लोगों के दिलों पर राज किया लेकिन जिसके
दिल में वह राज करना चाहती थी, उसके दिल के किसी कोने में भी जगह न बना पाई. याद
आया मैं बात कर रही हूं हमारी प्यारी आनंदी प्रत्युषा बनर्जी जिसकी मौत की वजह भी
कहीं न कहीं लिविंग रिलेशन ही बना. क्योंकि जब हम किसी के साथ रिलेशन मे होते है
तो उसे हमारी सारी चीजें पता नहीं होता है, लेकिन जब हम लिविंग में रहते है तो
दूसरा इंसान आपके साथ एक साथी की तरह ही रहता है. जिससे उसे अपने पार्टनर की सारी
चीजें पता चल जाती है।
जैसा की शादी में होता है आप जब एक साथ रहने लगते है तो एक दूसरे की
कई अच्छाईयां कई बुराईयों के बारे में पता चलता है और सारी मुसीबत भी यहीं से शुरू
होती है क्योंकि जबकि आपकी शादी हो जाती है तो सामजिक तौर पर उस इंसान से जुड़
जाते है उसे छोड़ना संभव नहीं है। उसके प्रति आपके कुछ दायित्व होते है।
लेकिन एक लविंग रिलेशन में ऐसा कुछ नहीं होता है, आपका अपने पार्टनर
के प्रति कोई सामजिक दायित्व नहीं होता, न ही आप किसी को खुलकर बता नहीं सकते है
कि आप किसी के साथ लिविंग में रहते है टीवी जगत बॉलीवुड में ये सारी चीजें आम
बातें है, क्योंकि उनके लिए रिश्ते तो खिलौने की तरह होते है गिरा टूटा और खत्म.
खैर चलिए बात करते है लिविंग रिलेशन की प्रभाव और मां पिता के
प्रतिक्रिया की. सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिविंग रिलेशन को सही ठहराया गया। सुप्रीम
कोर्ट द्वारा ही यह कानून पारित किया गया कि अगर आप व्यस्क है तो किसी के साथ भी
शादी के बिना रह सकते है सुप्रीम कोर्ट ने युवाओं की जरूरतों को देखते हुए ऐसा
कानून पारित किया था। उसे क्या पता था कि उसका नुकासन किसी की जान लेकर भरा जाएगा।
जैसे की प्रत्युषा और जिया खान के साथ हुआ.
प्रत्युषा एक अच्छी एक्ट्रेस थी उसने अपने अभिनय के दम पर ही अपने
जीवन का एक लक्षय पूरा कर लिया था। बस गलती की इतनी सिर्फ इतनी कि किसी से प्यार
कर बैठी, प्यार तो किया लेकिन उसके साथ लिविंग रिलेशन में रहने लगी। वहीं से ही
उसी जिदंगी की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी। क्योंकि वहीं से राज को उसकी जिदंगी के
बारे में सबकुछ पता चलने लग गया था और आखिरकार इस लिविंग रिलेशन ने उसकी जान लेकर
उसकी जिदंगी की कहानी को खत्म कर दिया.
इसके बाद ही शुरू होता है आरोप प्रत्यारोप का घिनौना खेल. जिसमें मरने
वाले के माता पिता जीवित लिविंग पार्टनर पर घिनौने आरोप लगाने शुरू कर देते है।
कोई कहता है कि वह उसे तंग करता था तो कहता है कि वह उसे मारता पीटता था तो किसी
का यहां तक कहना होता था कि वह तो पहले से ही शादीशुदा था। सोचने वाली बात है कि
यह सारी बातें किसी के मारने के बाद ही क्यों की जाती है। 21 सदीं में एक आम लड़की
भी किसी लड़के का एक थप्पड़ नहीं खाती तो एक एक्ट्रेस की ऐसी क्या मजबूरी होती है
कि वह इतना कुछ क्यों बर्दास करती है।
सार्वजनिक स्थानों, प्रेस
कांफ्रेंस में तो महिला सशक्तिकरण की बात करने वाली को ऐसा क्या होता जाता है कि
वह इतनी कमजोर कैसे हो जाती है कि वह अपने आप को ही शक्ति का परिचय नहीं बना पाती
हैं। प्रत्युषा के साथ भी कुछ ऐसा ही था। बालिका वधू सीरियल के द्वारा उसने आम
लड़कियों को आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया उन्हें अपने हकों के लिए लड़ना सिखाया।
फिर आखिर ऐसा क्या हो गया कि अपनी ही जिदंगी से लड़ नहीं पाई।
वजह एक ही थी लिविंग रिलेशन में रहना. ताज्जुब वाली बात है इतना कुछ
होने के बाद उसके मां बाप की आंखें खुलती है कि राज उसे प्रताड़ित करता था उसे
मारा करता था। जब इतनी बड़ी बात थी तो पहले ही अपनी बेटी को उसके साथ रहने से रोका
क्यों नहीं, पहले पुलिस को रिर्पोट क्यों नहीं की, क्यों नहीं किसी महिला आयोग को
तलब क्यों नहीं किया गया। जब इतनी परेशानी थी तो प्रत्युषा स्वयं ही उससे अलग
क्यों न हो गई तो शायद आज हमारे बीच में होती.
प्रत्युषा कोई आम लड़की नहीं थी कि उसके पास पैसों की कमी थी कि वह
अलग किसी दूसरे फ्लैट में नहीं रख सकती थी. डेली शॉप की लीड एक्ट्रेस थी पैसा तो
बहुत होगा उसके पास। प्रत्युषा की डिजाइनर फ्रैंड का कहना था कि वह जब भी अपने
कपड़े डिजाइन करवाती थी तो कभी भी पैसे उधारी नहीं लगाती थी। इतना पैसा होने के
बाद भी क्यों अलग नहीं होगी. जब उसे यह बात पता चली थी कि राज शादीशुदा उसी वक्त
उससे अलग हो जाना चाहिए था. लिविंग में रहने का तो कोई मतलब ही नहीं बनता था.
खैर आज भी हमारा समाज लिविंग रिलेशन को अच्छी नजरों से नहीं देखता है.
क्योंकि शादी एक सामजिक बंधन है लेकिन लिविंग में ऐसा कोई रूल फॉलो नहीं होता है।
लिविंग में पंगा सिर्फ सिलिब्रेटी की जिदंगी में ही नहीं होता है। आम इंसान जो भी
लिविंग में रहता है उनकी लाइफ में प्रोब्लम होना लाजमी सी बात है। बड़े शहरों में
तो लिविंग में ट्रेड सा चल पड़ा है. लिविंग में रहते तो है और उसके कुछ समय बाद
लड़ाईयां शुरू हो जाती है और फिर पुलिस रिर्पोट रेप का केस और पता नहीं क्या क्या
इल्जाम लगाए जाते है।
सोचने वाली बात यह कि लिविंग में रहने के बाद रेप कैसे हो जाता है। आप
अपनी स्वयं इच्छा से उसके साथ रह रहो है. शादी से पहले पति पत्नी का धर्म निभा रहो
हो तो रेप कैसा। मेरी जानकारी मे तो ऐसे लिविंग पार्टनर है जो रोज रात को लड़ते थे
और मारपीट भी करते थे और इतना ही नहीं बाद में लड़की लड़कों को घर से बाहर निकाल
देती है लड़की उसका कहृना होता था कि मैं इस रूम का किराया मैं देती है तो मै
तुम्हें अपने साथ नहीं रखूंगी. आखिरकार लड़के की शादी किसी और से हो जाती है.
खैर समझने वाली बात है कि लिविंग में रहने में कोई बुराई नहीं है अगर
आप अपने खर्च बराबर रखें. एक दूसरे को थोड़ा सा स्पेस दे। लिविंग में रहने से पहले
अपने पार्टनर की पूरी जानकारी निकाल ले ताकि बाद में जिदंगी खत्म करके लिविंग का
प्रमाण देना न पड़े। माता पिता को अपने दायित्व को समझना चाहिए अगर आपको पता है कि
आपका बच्चा लिविंग में रह रहा और परेशानी में रह रहा है तो उसे जल्द ही वह से अलग
कर दे ताकि कम से कम उसे जान बच जाए। जैसा कि प्रत्युषा और जिया के साथ हुआ था
क्योंकि समय रहते अगर कुछ किया जाए तो एक जान बचाई जा सकती है. उसके जाने के बाद
आरोप प्रत्यारोप लगने से कुछ नहीं हाथ लगता है.
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