सोमवार, 9 अक्टूबर 2017

अजीब सी खींच है तेरे चेहरे में

अजीब सी खींच है तेरे चेहरे में
अजीब सी खुशी है तेरे चेहरे में
चेहरे पर मुस्कान न होते हुए भी
हर बार हंसते हुए नजर आती है

अजीब से खींच है तेरे चेहरे में
जब भी देखूं इसे हर बार
एक नई चीज दिखती है
हर बार कुछ नयापन महसूस कराती है


अजीब सी खींच है तेरे चेहरे में
जितनी बार देखूं, हर बार
मुस्कुराती है और कहती है
ठग गई है पगली इसके चक्करो में

अजीब सी खींच है तेरे चेहरे में
जितनी बार देखूं हर बार कुछ नया दिखाती है
कुछ कर गुजरने का जज्बा भरती  है
जीवन में आगे बढ़ना नहीं
दौड़ना सिखाती है
अजीब सी खींच है तेरे चेहरे में


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