अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर फेसबुक पर हर तरह के
पोस्ट नजर आएंगे. कहीं महिला सशक्तिकरण तो कहीं मर्दों को नसीहत देने वाला लेख.
कहीं महिला की आजादी की बात होगी तो कहीं उनकी बेवसी दिखाई देगी। कहीं महिला दिवस
किटी पार्टी चल रही होगी तो कहीं महिलाएं दो वक्त की रोटी भी खा पा रही होगी। कहीं
महिलाएँ एसी के नीचे बैठकर ऑफिस में डाटाबेस बना रही होगी तो कहीं महिलाएं जलती
धूप में हमारे लिए अन्न उपजा रही होगी. किसी घऱ में महिला के बेटा पैदा करने पर
जश्न मनाया जा रहा तो कहीं बेटी पैदा करने के लिए गालियां सुननी पड़ रही होगी। कहीं
महिला सशक्तिकरण की बात चल रही होगी और कहीं किसी घर में महिला की पिटाई हो रही
होगी। क्या ऐसे मनाया जाएंगा महिला दिवस को. हमें अपनी सोच बदलनी है जीने का
नजरियां बदलना है. हम अपनी बेटी को तो बड़े प्यार से घर में रखते है उसके घर में
कोई परेशान हो जाते है और बहू को चप्पलों से मारते है. आज बात करते है कि महिला ही
महिला के सबसे बड़ी दुश्मन है. देश के हर दूसरे घर में क्लेश होता है वजह कौन होती
है ज्यादातर महिला क्योंकि महिला ही महिला को पसंद नहीं करती है. मां को लगता है
कि मेरा बेटा छिन लिया है और बहू को लगता है कि सास ही उसके पति को सिखाकर
पति-पत्नी में लड़ाईयां लगवाती है. एक ओर जहां अपनी बेटी को इतना प्यार करती है कि
उसे जरा सा दुखी नहीं देख सकती है वहीं दूसरी ओर बहू को डायन समझती है क्यों वो
बेटी समान नहीं हो सकती क्या उस घर उतना ही हक बहू का नहीं हो सकता जितना की उस
बेटी का है. अपनी बेटी को कोई हाथ लगाए तो दर्द होता है लेकिन बहू को भले ही सास
घसीट घसीट कर मारे उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है क्या क्योंकि वो उसकी बेटी नहीं
बहू है. हम अपने ही घऱ में एक दूसरे के दुश्मन बन जाते है। वहीं हाल बहूओं का भी
है अपनी मां को मां और सास को खड्डूस समझती है. जिसकी वजह से घरों में क्लेश होते
है. आज हमें जरूरत है अपनी सोच बदलने की. सिर्फ आठ मार्च को महिला दिवस मना लेने
से कुछ नहीं होता सोच बदलना है घऱ को बदलना है. अगर कोई लड़की छोटे कपड़े पहनकर
पार होती है तो कोई लड़का देखता है तो कोई तजुव वाली बात नहीं है लेकिन हैरानी की
बात यह है कि लड़कियां कई बार इतने गंदे तरीके से देखती है कि आंखों से ही रेप कर
देती है सोच बदलने की जरूरत है. सिर्फ कहने भर से हम मॉडर्न नहीं हो जाएगे.
लड़कियों में ये बडा प्रचलन है अगर कोई ड्रीक कर रही है तो उसे चरित्रहीन समझने
लगती है. कॉम ऑन गर्ल्स सोच बदलो छोटे कपड़े पहनने या दारू पीने से कोई लड़की
चरित्रहीन नहीं होती है. ये हमारी सोच है जो उसे चरित्रहीन बना देती है. महिलाओं
की बात हो रही तो देश की राजनीति को इससे दूर नहीं रखना चाहिए आखिरकार महिलाओं का
मामला है और महिला ही महिला की सबसे बड़ी दुश्मन होती है तो हाल की घटना सबको याद
होगी कि आजतक सांसद में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था लेकिन बात अगर महिला की हो तो
कुछ भी हो सकता है. तो याद कीजिए जब स्मृति ने जब मायावती से कहा था कि अगर वो
उसके जबाव से संतुष्ट न हो तो वो अपना सर कटवाकर ऱखा देगी। स्मृति ने तो ताव ताव
में आकर कह दिया लेकिन बहनजी तो बहनजी ठहरी महिला जो है तो दुश्मनी तो कहीं न कहीं
होगी तो उन्होनें स्मृति को सर लाने के लिए कह ही दिया. हमें अपनी सोच बदलनी है
सिर्फ महिला सशक्तिकरण का नारा लगाने से कुछ नहीं होगा. पहले महिला को महिला को
सम्मान करना होगा तभी हमारा घऱ आगे बढ़ सकता है तभी देश आगे बढ़ सकता है,
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