गुरुवार, 31 मार्च 2016

क्या सात जन्मो के बंधन को हम एक बार भी अच्छी तरह से बांधकर नहीं रख पा रहे है

शादी दो अक्षरों का शब्द हमारी जिदंगी में कई बदलाव ले आता है. शादी दो दिल और दो जिस्मों को ही मेल नहीं है ब्लकि दो परिवारों का मेल भी है। सात जन्मों का बंधन है यह शादी। लेकिन पिछले कुछ समय से तो ऐसे लगने लगा है जैसे शादी शब्द का तो कोई मतलब ही नहीं रह गया है. शादी नहीं खेल है आज इसके साथ कल उसके साथ। शादी के महत्व को ही कम कर दिया है लोगों ने इसकी विश्वसानियता को भी झूठा कर दिया है आखिर ऐसा क्यो। क्या हम रिश्ते को संभालकर नहीं रख पाते है । क्या इतना भारी हो गया है शादी का यह बंधन की तलाक नाम का तीन अक्षरों वाला शब्द उस पर भरी पड़ रहा है। आए दिन किसी न किसी का तलाक हो रहा है। आखिर ऐसा क्या हो जाता है कि सात जन्मों को हम इतनी जल्दी तोड़ने पर मजबूर हो जाते है। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि बात करके किसी चीज का समाधान निकाल सके या फिर ऐसा नहीं हो सकता कि कुछ ऐसा किया जाए कि तलाक पर हमलोगों की जय हो. क्या लोगों के तथ्य है कि अगर आप किसी एक के साथ नहीं रह पाते है तो रोज-रोज के झगड़ों से अच्छा है कि अगल हो जाए. क्यों आखिर अलग होने से ही सारी समस्या का हल हो जाता है क्या। लड़ते तो हम अपने भाई-बहनों से भी है कई बार मां बाप से भी बहस हो जाती है तो क्या हम उनसे अलग हो जाते है, नहीं न तो फिर पति-पत्नी के रिश्ते में ऐसा क्यों नहीं हो सकता है. हम एक बच्चे की तरह क्यों नहीं रह सकते जो अपने भाई-बहन से लड़ता तो है लेकिन थोड़ी देर बाद ही सारी बाते भूलाकर फिर वैसा ही हो जाता है जैसा कि पहले था. या फिर ऐसा कहा जाना सही होगा कि आधुनिकता हमारी जिदंगी को ऐसी तलाक नाम के दलदल में लिए जा रही. आधुनिक होने में कोई बुराई है आप पढ़े लिखे किसी अच्छी एमएनसी में ज़ॉब करे इसमें कोई बुराई नहीं है. आप दारू पी रहे है पार्टी कर रहे है इसमें भी कोई बुराई नहीं है. बस बुराई इस बात है कि इन सभी चीजों को तवज्जो तो देते है लेकिन जिनको तव्वजो देना चाहिए हमारा घर हमारा परिवार उन्हें हम देते ही नहीं है. यह सिर्फ महिलाओं के साथ ही नहीं है किंतु पुरूषो के साथ भी यही दिक्कत है, और यहीं से फिर शुरू होता है तलाक का घिनौना नाटक जो सात जन्मों के बंधन को एक जन्म तक भी बांधकर नहीं कर पाता है। अब हाल की घटना में प्रियंका कपूर की बात को ही ले लेते है. प्रियंका कुछ याद आया दिल्ली की पॉश एरिया डिफेंस कॉलोनी के ए-46 के मकान वाली जिसने जिदंगी से दुखी होकर मौत को तो गले लगा लिया, लेकिन बोल्ड होने का परिचय जीकर नहीं दे सकी. बात सिर्फ इतनी थी उसका पति नहीं चाहता कि वो काम करे क्योंकि उसका काम इंवेट का था। रोज नई-ऩई पार्टियां और नए-नए लोगों से मिलना उसे पसंद नहीं था. वहीं दूसरी ओर प्रियंका नितिन के बच्चों को अपने पास नहीं रखना चाहती थी. सब यही दो बातें थी जिसने एक सुदंर बोल्ड मॉडल की जान ले ली. ताजुब वाली बात है कि इसमें भी वजह कहीं न कहीं तलाक ही बनी. एक दिन किसी काम के सिलसिले में नितिन प्रियंका से मिलता है क्योंकि दोनों का काम एक था तो मिलना भी हो गया. दोनों की ही इंवेट मैनेजमेंट की कंपनी थी. पहली मुलाकात की वो दो आंखे चार कब हो गई आंख का पहली बार का प्यार जुबान तक कब आ गया कुछ पाता ही नहीं चला. बस पता तो तब चला सारी दुनिया को जब प्रियंका दुनिया छोड़कर चली गई और नितिन जेल में।  दोनों के बीच में प्यार बढ़ा मुलाकतें बढ़ी और छह महीने में शादी की बात पक्की मां बाप सब को नजर कर लिया लेकिन शादी की तैयारी कर ली. किंतु शादी मे तो एक रोड़ा आने लगा वह था नितिन की पहली बीवी और पहली बीवी से तलाक के बिना तो प्रियंका से कभी शादी नहीं कर सकती थी तो उसने निश्चय किया कि वह अपनी पहली पत्नी को तलाक दे देगा क्योंकि वह प्रियंका को बहुत प्यार करता था. सोचने वाली बात यह है कि इतनी सुदंर तेज तर्रार लड़की का बस इतना ही दिमाग था अगर नितिन पहली बीवी को तलाक दे सकता था तो प्रियंका को क्यों नहीं दे सकता है आखिर ऐसी बेवकूफी क्यों. मेरे हिसाब से प्रियंका को जब यह पता चला था कि नितिन  शादीशुदा है तो उसे उसी वक्त उसे छोड़ने के बारे में सोचना चाहिए था. हां ऐसा संभव नहीं है लेकिन कोशिश करती तो शायद आज हमारे बीच में होती. खैर वह प्यार में पागल थी इसलिए किसी के घर का दिया बुझकर खुद का जलाने चली थी जो तीन महीने भी नहीं जल सकता और आखिरकार ऐसा बूझा की अब कभी नहीं जल सकता है. नितिन उसे मारता होता था उसका कहना था कि वह जॉब छोड़ दो क्योंकि वो अक्सर दोस्तों के साथ पार्टी करती थी और घूमना फिरना करती थी लेकिन ये सब तो नितिन को पहले से ही पता था तो फिर इन सब चीजों का तो कोई मतलब ही नहीं बनता. क्योंकि अगर आपको उनकी सारी हरकतें न पता होती तो कुछ कहा भी जा सकता था. वैसे सोचने वाली बात है जब इंसान के ब्यॉयफ्रैंड गर्लफ्रैंड के दायरे मे रहता है तो उसे सबकुछ अच्छा लगता है. लेकिन शादी होते ही ऐसा क्या हो जाता है सब समय प्यार में डूबे रहने वाले आज एक दूसरे की शक्ल तक देखना नहीं चाहते है सोते भले ही एक ही पलंग पर हो लेकिन ध्यान हमेशा इधर-उधर होता है. इसका सबसे अच्छा उपाय  है या तो आप शादी मत करो या फिर शादी करो तो उसे ऐसे भी ग्रहण जो की वह इंसान है. प्रियंका की गलती इतनी थी कि वो नितिन के बच्चों को नहीं रखना चाहती थी अपने साथ. लेकिन प्रियंका को तो यह बात शादी से पहले ही पता था कि उसके दो बच्चें है और वह उसे अपने साथ ही रखेगा तो पहले ही इस बारे में सोच विचार कर लेती तो शायद हमारे बीच में होती. शादी में मायने समझाएं शादी के बाद जिदंगी का अंदाज बदलाए क्योंकि फिर आप अकेले नहीं रह जाते आपके साथ एक इंसान ही नहीं एक परिवार जुड़ जाता है. 

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