बढ़ती आधुनिकता का दौर और सुख सुविधा से लैश हमारी दुनिया हमें घर
बैठे ही सारी सुविधाएं मुहैया करा देती है। शॉपिग करनी हो या कहीं यात्रा करनी हो,
होटल में रूकना हो या कहीं जाने के लिए गाड़ी बुक करनी हो, बस मोबाइल में ऐप
डाउनलोड किया और हो गई सारी परेशानी दूर।
लेकिन आज से कुछ साल पहले तक ही जब तक ई-मार्केटिंग
का दौर नहीं आया था, तो लोगों को घंटो भर लंबी लाइन में लग के टिकट लेनी पड़ती थी
और अगर कैंसिल करवानी हो तो वहीं दिक्कत दोबारा होती थी। लेकिन अब सबकुछ इंसान की
हथेली में आ गया है। एक बटन दबाया और आपके पास सारी सुविधाएं उपलब्ध हो जाएंगी। टिकट
लेना हो कैसिंल करवाना हो। इससे से भी बड़ी बात तत्काल की टिकट लेने के लिए पहले
लोग रात में ही लंबी लाइन लगा लेते थे। मतलब अगर कहीं इमरजेंसी में जाना हो तो
पहले अपनी एक रात काली करवाओं और उसके बाद कहीं जाओ।
लेकिन अब तो तत्काल टिकट का
ही समय नहीं बदल गया ब्लकि इसके साथ-साथ स्लीपर और एसी के रिर्जवेशन के लिए समय भी
अलग-अलग नियुक्त कर दिया गया है। जिससे की आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी न
हो। यह तो हुई ट्रेन की बात अब जरा बस की बात भी कर लेते है कहीं दूर-दराज जाना है
तो अपनी सुविधानुसार वोलवो की घर बैठे टिकट करवाई और आसानी से बस के समयानुसार घऱ
से निकल गए। यह तो हुई दूर-दराज टूर करने जा रहे लोगों के लिए सुविधा की बात और
दूर-दराज तो हम कभी-कभी छुट्टियों में घूमने जाते है।
लेकिन यात्रा का सबसे ज्यादा
असर हमारी जिदंगी में रोजमर्रा की जीवन शैली पर पड़ता है। ब़ड़े शहरों में यातायात
की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध है। बस, ऑटो, मेट्रो, कैब न जाने कितनी सारी सुविधाएं
आपके लिए विकल्प के तौर पर आपकी जिदंगी में राज करती है। घर बैठे ही एक ऐप में
किल्क किया और कैब आपके दरवाजे पर हाजिर हो जाती है। रात हो या दिन हो आपको जाने
के लिए सोचने नहीं पड़ेगा क्योंकि आपके शहर में तो कैब की सुविधा उपलब्ध है। बस एक
बार किल्क किया और हाजिर। लोग इसका इस्तेमाल भी बहुत ही जोरों शोरों से करते हैं।
ऑफिस के लिए लेट हो गए चलो कैब को कॉल कर लो, दोस्तों के साथ पार्टी के लिए जाना
है तो कैब को बुला लो, रात को ट्रेन या फ्लाईट तो बिना हिचकिचाहट के कैब को बुला
लेते है क्योंकि हमें पता है कि वह हमें सही समय पर अपने गणतव्य स्थान पर पहुंचा
देगी।
लेकिन जिस प्रकार हम कैब पर भरोसा करते है क्या सच में वह उस भरोसे के लायक
है। आए दिन कुछ न कुछ ऐसी घटनाएँ होती है जो कैब कंपनी को कटघरे में खड़े कर देती
है। कंपनियां कटघरे में खड़ी हो भी क्यों न क्योंकि उसने स्टाफ करते ही कुछ ऐसे
काम हैं। लेट नाईट में लड़कियों के लिए सबसे भरोसेमद अगर कोई यात्रा का साथी है तो
वह है कैब। लेकिन क्या कैब इतने भरोसे लायक रह गई है कि रात को हम जिदंगी की घड़ियां
उसके हाथ में दे दे। आए दिन कैब में लड़कियों के साथ होती छेड़छाड़ की घटनाएँ तो
आम सी बात हो गई है।
साल 2014 में सबसे पहले ऊबर कैब कंपनी के एक ड्राइवर ने एक
एमएनसी में काम करने वाली लड़की के साथ रेप किया था। बहुत दिनों तक यह मामला चलता
रहा। आखिरकार ऊबर ने उस ड्राइवर को कंपनी से निलंबित कर दिया। कोर्ट में मामला चला
और उसे सजा सुनाई गई। ऊबर को लेकर कई तरह के विरोध प्रदर्शन हुए लेकिन कंपनी बंद
नहीं हुई। आखिरकार कंपनी ने अपनी ड्राइवर की हायरिंग में सख्ती दिखानी शुरू कर दी।
लेकिन घटनाएँ कम नहीं हुई आए दिन इन कैब कंपनियों का कुछ हिटलर गिरी वाला रवैया
देखने को मिलता रहता है।
कैब कंपनियों अपने यात्रियों की सुविधा के लिए वायदों तो
लंबे-लंबे करते है लेकिन पूरा एक भी नहीं कर पाती है। यह तो केवल दिल्ली की बात है
बाकी शहरों में पता नहीं इनका रवैया कैसा होगा। हमेशा महिला की सुरक्षा की बात
करने वाले क्या सच में महिलाओं की सुरक्षा कर पा रहे है या यह सारी बातें मीठे बोल
तक ही सीमित है।
साल 2014 में एक भारतीय नारी के साथ कैब में छेड़छाड़ की घटना हुई
थी लेकिन शनिवार रात राजधानी के चितरंजन पार्क में कैब चालक ने एक विदेशी लड़की की
साथ छेड़छाड़ की। बेल्जियम की रहनी वाली युवती शनिवार को गुडगांव से अपनी एक दोस्त
से मिलने के लिए आई। युवती ने चितरंजन पार्क आने के लिए ओला कैब बुक की। कैब भी तय
समयानुसार उसके दरवाजे पर पीक करने के लिए पहुंची।
लेकिन रास्ते में अचानक कैब
ड्राइवर जीपीआरएस से गलत दिशा मे ले जाने लगा। यह बात युवती को रास नहीं आई उसने
तत्काल अपनी दोस्ती को फोन लगाकर इसकी जानकारी दी। युवती की दोस्त ने ड्राइवर से
बात की वह उसे बार-बार भरोसा दिलाता रहा कि वह उसे सही दिशा में लेकर जा रहा है।
इसी बीच उसने कैब में बैठी लड़की को आगे आने को कहा और फोन से कैब बुक कराने के
सारे मैसेज डिलीट कर दिए। सारी घटना के बारे में युवती ने अपनी दोस्त को बताई।
दोस्त ने इसकी जानकारी कैब प्रसाशन को दी तो उन्होंने ने तत्काल ही ड्राइवर को
निष्कासित कर दिया गया है। लेकिन सोचने वाली बात यह है कि ऐसा कब तक चलता रहेगा।
हमेशा महिला सेफ्टी की बात करने वाली कैब कंपिनयां आखिर अपने स्टाफ पर ही नियंत्रण
क्यों नहीं रखा पाती है। आखिर कब तक इनकी इस तरह की गलतियों को नजरअंदाज किया जाऐगा।
समय है इस तरह के कैब पर नकेल कसी जाए और कड़ी कारवाई की जाए ताकि महिलाएं अपने आप
को सेफ महसूस करें।
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