बड़े प्यार से सारी दुनिया
से बेखबर वो दोनों सारी रात घूमते रहे। बिना किसी की परवाह किए एक दूसरे के हाथ
में हाथ डालकर बेखौफ पता नहीं क्या चाहते थे, वो दो परिंदे। न हीं प्यार था और न
ही दोस्ती का कोई ऐसा शुरूर की सारी रात घूमा जाए। लेकिन शर्त जो लगाई थी कि पेपर
खत्म होते है घूमेगें।
लड़की शुरू से ही तेज तर्रार थी तो उसने भी बिना
सोचे समझे उसे कह दिया कि तेरी सारी रात घूमने की इ्च्छा पूरी कर दूंगी। बिना किसी
डर, बिना किसी हिचकिचाहट के। जानते तो दोनों परिंदे एक-दूसरे को बचपन से ही, लेकिन
बड़े होकर ऐसा दिन आएगा ऐसा कभी नहीं सोचा था।
बात भी बड़े अजीब तरीके से शुरू हुई। पता नहीं
कौन से समय था जब दोनों का मिलन लिखा हुआ था। किसी ने उस पगली को बता दिया कि तेरे
वहां का एक लड़का उसी शहर में रहता है जहां तू रहती है। वह पागली तो इस बात को
सुनकर फूली नहीं समा पा रही थी कि उसकी वहां से कोई पीएचडी कर रहा है। लेकिन खुशी
ज्यादा देर तक नहीं रही क्योंकि जिदंगी की व्यस्तता में वह भूल गई उस प्यारी सी
बात को। अचानक एकदिन फेसबुक चलाते वक्त उस लड़के की कही हुई बात याद आ गई।
फिर क्या था दिमाग चलाना शुरू कर दिया उस पगली
ने और बिना कुछ सोचे समझे उस फ्रेंड रिकवेस्ट भेज दी। फिर क्या था उस कमबख्त ने भी
सुंदर लड़की देखी नहीं कि रिकवेस्ट एक्सेप्ट कर ली। रिकवेस्ट एक्सेप्ट हुई है तो
बातें भी जरूर होगी। बातों का कारवा शुरू हुआ एक दूसरे के फोन नंबर लिए और अब फोन
मे भी बातें शुरू कर दी।
बातों का सिलसिला इस कदर
बढ़ा की पेपर नाम का पहाड़ भी बंद नहीं करा पाया। रोज एक दूसरे से यही कहते जल्दी
से पेपर खत्म हो और मिला जाए। लेकिन दिल की धड़कनों को तो कुछ और ही मंजूर था। दिल
की धड़कने इतनी तेज दौड़ने लगी कि समुद्र की उफान भी उसके सामने कुछ न था। आखिरकार
वो दिन भी आ गया जब उसके पेपर खत्म हो गए। अब आई मिलने की बारी।
तय समयानुसार हम सारे दोस्त मिलें क्योंकि उस
पागल के अलावा भी कोई और था उस कैंपस में जो उस पागली के करीब था। खैर मेल-मिलाप
गप्पे सप्पे भी शुरू हुई किसी को पता नहीं था कि यह कारवा सुबह तक चलेगा। बीच
पहाड़ी के विरान जंगल में शहर की चहल-पहल से दूर तीनों बातें करने में व्यस्त थे।
एक सहेली चाहती कि मेरी दोस्त की किसी तरह इस पीएचडी वाले अंकल के साथ बात बन जाए
तो वह भी उसके साथ शेट्ल हो जाए।
बीच पहाड़ी के बीच शादी की
बातें चलने लगी। वैसे चल तो सिर्फ मजाक रहा था। लेकिन उस पागली के दिल में तो जैसे
लड्डू फूट रहे थे। प्यार की धारा तेजी से सा सा करती हुई जिदंगी के कई पहलूओँ को
कुछ ही पल में पूरा जी गई थी। लेकिन वो दोनों तो मजाक कर रहे थे। दिन का सीना
फाड़ते हुए रात का काला अंधेरा भी कम होने को था। बड़ी मुश्किल से दोनों पागल और
पागली को अकेले में बात करने का मौका मिला। पागली के दिल में तो सिर्फ ही हलचल हो
रही थी।
लेकिन उसके शरीर के नाजुक
अंगों में हलचल होना शुरू हो गई। होने भी लाजमी सी बात है रात को आप एक अच्छी सी
लड़की को लेकर घूम रहे हो तो ऐसा भी हो सकता है। पगली ने उसे बातों में उलझाया
रखा। लेकिन उसकी तो हालात खराब हो रही थी उस तंग जीन्स में जिसमें उसके नाजुक अंग
बाहर निकलने के लिए परेशान हो रहे था।
पहले बार उससे मिला था तो उसे इस बारे में बता
भी नहीं सकता था। आखिरकार उसने उससे कहा कि चलो मेरे हॉस्टल चलकर कपड़े बदलकर आते
है मुझे बहुत ही गर्मी लग रही है। गर्मी तो थी ही लेकिन इसके अलावा भी मामला भी
कुछ अलग ही था।
आखिरकार उसने कपड़े बदल ही लिए और रात को घूमने
का करावा फिर शुरू किया। बहुत देर तक अपनी भावनाओँ को बचाए रखने बाद उसने आखिरकार
पागली को छूने की हिम्मत की क्योंकि अब उसके नाजुक अंग और ज्यादा उसके साथ नहीं दे
पा रहे थे।
हिम्मत और समय की नजाकत को देखते हुए उसने पगली की कंधे पर हाथ रख
लिया। पगली को यह बात जरा अच्छी नही लगी। लेकिन उसने कुछ कहा नहीं।
इसी तरह कैंपस में घूमते-घूमते भोर के चार बजा लिए। अब निर्णय लिया गया कि अब जाके
सो जाते हैं। सोने का नाम लेते ही उसके नाजुक अंग जैसे बाहर आने को तैयार हो गए।
सारी सहनशीलता खत्म हो गई और अंत में उसने पगली को अपनी बांहों में भरकर उसे किस
करने का सोचा। लेकिन उस पगली ने उसके सारे आरमानों पर पानी बहा दिया। सारी रात
बेचार उसे लेकर घूमता रहा और बाद में उसे एक किस भी नसीब हुए। अंत में उसने अपनी
शर्त को पूरा किया और सारी रात उसके साथ घूमते रही।



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