देश के चारों कोनों में अब तो महिलाओं का ही राज हो गया है। अब जाकर
लगा है महिला सशक्तिकरण का असली नारा। आज तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बहुत ही
खुश होगें क्योंकि जब से वह प्रधानमंत्री बने है तब से ही महिला सशक्तिकरण को
बढ़ावा दे रहे हैं। चाहे वह जनधन योजना के द्वारा हो या फिर उज्जवला योजना के
द्वारा। वो हर तरह से महिला को आगे बढ़ाना चाहते हैं। अब तो देश के चारों कोने में
भी महिला मुख्यमंत्रियों का ही राज है। देश को चारों तरफ से घेर रखा है महिला
बिग्रेड ने।
खैर पहले भी देश के चारों कोनों में महबूबा, आनंदी बेन, दीदी और
अम्मा का ही राज था। लेकिन आज तो बात ही कुछ और हो गई है। आज से पांच साल के लिए
दीदी और अम्मा दोबारा से सत्ता पर काबिज हो गई हैं। दोनों ने तो लगता है जनता पर
जादू सा कर रखा है। इतना बड़े-बड़े भ्रष्टाचार में दोनों के नाम आए। लेकिन गद्दी फिर
भी दोनों को नसीब हो ही गई। वैसे इस बार दीदी और अम्मा के जीतने की ऐसी कोई उम्मीद
नहीं लगाई जा रही थी। फिर भी दीदी ने तो बंगाल में लेफ्ट को अपने आस-पास भी खड़ा
होने नहीं दिया।
हमेशा से गरीबों के हित की बात करने वाली दीदी ने वैसे तो शारदा घोटाले
में गरीब लोग के बहुत सारे पैसों को पता नहीं कौन से कोने में लुप्त करवा दिया।
लेकिन फिर जनता ने उसका साथ नहीं छोड़ा। यह तो एक प्रेमी प्रेमिका वाला हाल है। तुम
मेरे साथ जितनी मर्जी वफा करो मैं तुम्हारे साथ कभी धोखा नहीं करूंगा। भले इसके
लिए मेरी जान ही क्यों न चली जाए। अच्छा हुआ भी कुछ ऐसा ही है अप्रैल की शुरूआती
महीने में कोलकाता के सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाले इलाके में फुट ओवर ब्रिज गया कई
लोगों की जान चली गई। लेकिन लोगों ने दीदी के साथ धोखा नहीं किया और आखिरकार छोटी
कद की दीदी को बड़ी गद्दी पर बैठा ही दिया।
दीदी जब से सत्ता में आई है
सिर्फ एक ही नारा लगाती रहती है। “मां, माटी, माटी” और इसी के बल पर वह गरीब जनता के दिल पर
राज करती है। गरीब जनता को तो सिर्फ मां,माटी,मानुष ही समझ में आता है। लेकिन वह उसके
भीतरी सच को समझने की कोशिश भी नहीं करता है।
आम जनता के पास इतना समय नहीं होता है कि वह नेता की चिकनी चुपड़ी बात
पर दिमाग लगाए वो तो बस चुनाव से पहले आकर नेता जी ने जो कह दिया सब उसी के बहकावे
में आकर वोट कर देते है। हाथ जोड़ लोगों से वोट मांगते नेता द्वारा किए गए वायदे
ही सही लगाते है।
खैर दीदी ने जनता से जो वायदों किए वो सारे तो पूरे नहीं कर पाई लेकिन
गरीब जनता के पेट के रास्ते से सत्ता में आ ही गई। मुझे अभी भी याद है जब पिछली
बार दीदी सत्ता में आई थी तो आते है जनता के पेट रास्ते से एंट्री की थी। सबसे
पहला काम गरीब लोगों के बीच चावल बटवाएँ थे। इस बार देखते है दीदी ऐसा क्या कमाल
करती है जिससे कि वह दोबारा सत्ता में आ जाए।
ये तो हुई दीदी की बात अब जरा अम्मा पर भी ध्यान दे देते हैं। अम्मा
तो बड़े ही मुश्किल आंकड़ों से करूणानिधि को हराकर सत्ता में दोबारा आई हैँ। वैसे
इस बार दीदी की तरह अम्मा भी भ्रष्टाचार के मामलों में अच्छी खासी उलझी रही है।
लेकिन फिर भी जनता ने उन्हें धोखा नहीं दिया उसे अपने पलकों पर बैठकर रखा और
दोबारा सत्ता दे दी है। अब देखना यह है अब
आने वाले इन पांच सालों में दीदी और अम्मा क्या कमाल दिखती हैं।
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